Skip to main content

ई - ऑफिस, स्वागतम और सीएमओ ऑनलाइन पोर्टल हुआ सुरु

ई ऑफिस , स्वागतम और सीएमओ ऑफिस क्या है?


ई - ऑफिस, स्वागतम और सीएमओ ऑनलाइन पोर्टल हुआ सुरु

 छत्तीसगढ़ में ई गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए तथा भ्रष्टाचार को कम करने के लिए आईटी का उपयोग किया जा रहा है बुधवार को साय ने अभी तीन पोर्टल लॉन्च किया जिसमें ई - ऑफिस स्वागतम और सीएमओ ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया । इस पहल से आने वाली सरकार में भ्रष्टाचार की गुंजाइश को कम करने तथा सरकारी कामकाजों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए और पारदर्शिता लाने के लिए छत्तीसगढ़ की सरकार ने ई गवर्नेंस आईटी का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करने का निर्णय लिया है। जिसका शुभारंभ साइन ने महानदी भवन में बटन दबाकर किया । इस दौरान साइन ने मुख्य सचिव को सभी विभागों में ई ऑफिस पोर्टल उपयोग करने के निर्देश दिए तथा सभी फाइलों का डिजिटल कारण करने का निर्देश भी दिए। यह 
 तीनों ऑनलाइन पोर्टल विष्णु देव सहाय ने मंत्रालय में लॉन्च किया भ्रष्टाचार रोधी होंगे यह तीन ऑनलाइन पोर्टल भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश ही नहीं । 

ई ऑफिस पोर्टल क्या है ?

ई - ऑफिस प्रणाली शुरुआती चरण में सामान्य प्रशासन में लागू किया जाएगा इसकी सहायता से जितने भी फाइल हैं सबका डिजिटल कारण किया जाएगा जिससे एक ऑफिस से दूसरी ऑफिस में फाइलों को ले जाने का झंझट खत्म हो जाएगा समय की भी बचत होगी साथ में फाइलों को खा जाने का झंझट खत्म तथा कोई भी हेरा फेरी नहीं हो पाएगी। फाइलों की भी खो जाने की या गुम होने की कोई दिक्कत ही नहीं रहेगी। 

क्या है स्वागतम पोर्टल

मंत्रालय में मुख्यमंत्री तथा अधिकारियों से मिलने के लिए आगंतु को के लिए यह पोर्टल बनाया गया है जिसमें आगंतुकों की संपूर्ण जानकारी रहेगी तथा इससे मंत्रियों तथा अधिकारियों तथा आगंतुकों की सुरक्षा सदृंद होगी । तथा आगंतुकों के प्रवेश में सरलता होगी। 


सीएमओ पोर्टल क्या है ?

छत्तीसगढ़ सरकार की इस पोर्टल से एक क्लिक में छत्तीसगढ़ में सारी योजनाओं का पता चल जायेगा आम जनता को तथा इस पोर्टल की मध्यम से छत्तीसगढ़ की कला , संस्कृति तथा इतिहास की जानकारी पता होगी । छत्तीसगढ़ के सभी जिलों और उसे महत्वपूर्ण जानकारी का भी पता लग पाएगा ।

विष्णु देव साइन ने कहा

इस मौके पर विष्णु देव साइन ने कहा सुशासन के दिशा में यह पोर्टल ई ऑफिस प्रणाली तथा स्वागतम पोर्टल छत्तीसगढ़ सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होने वाली है। सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सरकारी काम में पारदर्शिता लाने के लिए तथा भ्रष्टाचार में जीरो टॉलरेंस के लिए विष्णु देव की सरकार ने आईटी का उपयोग करना शुरू कर दिया है। और यह जो आने वाला समय होगा यह ई गवर्नेंस जो कि छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन को स्थापित करने में बहुत बड़ा योगदान करेगी। ए ऑफिस की सहायता से ऑफिस में फाइलों के निराकरण में कोई भी अनावश्यकता देरी नहीं होगी। गलती की गुंजाइश बहुत कम हो जाएगी साथ में हर फाइलों की ट्रैकिंग और उसकी काम का स्तर भी पता चल जाएगा। विष्णु देव साय ने बताया कि सीएमओ पोर्टल के जरिए सरकार की योजनाओं कार्यक्रमों फसलों तथा जनहितों से जुड़ी सभी काम - काजो की जानकारी यहां प्राप्त होगी


Popular posts from this blog

छत्तीसगढ़ का जिला निर्माण का क्रम Notes ( Chhattisgarh ka jilla nirman ke kram )

    छत्तीसगढ़ के जिले निर्माण का क्रम  1961 -62 में बने जिले - इस समय छत्तीसगढ़ राज्य नहीं बना था और यह मध्य प्रदेश प्रांत का हिस्सा था 1961- 62 में 2 जिलों का निर्माण हुआ रायपुर और बिलासपुर छत्तीसगढ़ के राज्य बनने से पहले।  1906 में बने जिले - 1906 में तीसरा जिला जो छत्तीसगढ़ के बनने से पहले बना वह था दुर्ग इस प्रकार 1906 में छत्तीसगढ़ जिला छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले कूल 3 जिला थी।  Read More : छत्तीसगढ़ के वन्य जीव अभ्यारण 1948 में बने हुए जिले - 1948 जब हमारा देश आजाद हुआ इस समय 3 जिले और बने रायगढ़ ,बस्तर ,सरगुजा इस तरह 1948 तक छत्तीसगढ़ बनने से पहले कुल 6 जिले बन चुके थे। 1973 में बने जिले-    1973 केवल एक जिला बना जिसे राजनंदगांव कहते हैं । इस समय छत्तीसगढ़ बनने से पहले छत्तीसगढ़ में जिले का क्रम जो सातवें नंबर का जिला है वह राजनंदगांव है। Note - याद करने की ट्रिक  ( 1948 से लेकर 1973 जिलों को इस प्रकार से आप याद कर सकते हैं ) "राय बस सर  राज"  राय - रायगढ़ बस  - बस्तर सर - सरगुजा राज - राजनंदगांव

छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन Notes ( Chhattisgarh ka prakrutik vibhajan Notes )

    छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन  भू - प्राकृतिक रूप से छत्तीसगढ़ को चार प्रदेश में बांटा गया है जो इस प्रकार है-  (1). पूर्वी बघेलखंड का पठार  (2). जसपुर शामली पाठ प्रदेश (3). महानदी बेसिन (4.) दंडकारण्य का पठार    भू - प्राकृतिक भौतिक स्वरूप के आधार पर भी छत्तीसगढ़ को बांटा गया है इस प्रकार से-  (1). मैदानी प्रदेश (2). पहाड़ी प्रदेश (3). पठार एवं पाठ प्रदेश   (1). पूर्वी बघेलखंड का पठार  • उत्तरी सोन नदी बहती है इसीलिए इसे सोन के बेसिन का भाग भी कहा जाता है। • यह पठार को गंगा नदी और महा नदी के बीच जला विभाजन का दक्षिण भाग भी कहा जाता है।  • इसमें आर्कियन शैल समूह और पहाड़ी क्षेत्र में प्रमुख रूप से गोंडवाना शैल समूह की प्रधानता है। • इसमें लाल पीली मिट्टी मुख्य रूप से पाई जाती ।  फसल -  चावल ( मुख्य ) , ज्वार , तिल , अलसी ।   औसत वर्षा-  125 सेंटीमीटर. औसत ऊंचाई - 700 भी. Read More: छत्तीसगढ़ के संभाग और जिला के notes Note - कर्क रेखा किस के मध्य से गुजरती है। ( कोरिया के 16 तहसील से कर्क रेखा और भारतीय मानक...

UPSC Geography खगोल विज्ञान की Notes ( astronomy notes in Hindi )

 UPSC Geography Toppers E Notebook हिंदी में  जब हम upsc Geography (Prelims+Mains) का अध्ययन करते हैं तो इसे चार भागों में बांटकर दिन कहते हैं जिसमें क्रम इस प्रकार है-  (1.) Astronomy  (2.) Geology (3.) Topology  (4.) Indian and World geography (1.) खगोल विज्ञान (Astronomy) वह विज्ञान जिसमें अंतरिक्ष की सारी चीजें जैसे कि तारे ग्रह उपग्रह नक्षत्र , खगोलीय पिंड आदि विषय से संबंधित अध्ययन किया जाता है उसे खगोल विज्ञान (astronomy ) कहां जाता है। Note:- खगोल विज्ञान को रसिया में कॉस्मोलॉजी कहते हैं। (i) ब्रह्मांड-  दिखाई देने वाली समस्त आकाशीय पिंड ब्रह्मांड जिसमें ग्रह उपग्रह खगोलीय पिंड पेड़ पौधे पृथ्वी सब आते हैं। ब्रह्मांड लगातार विस्तार हो रहा है और इसमें लाखों-करोड़ों संख्या में तारे हैं। (ii) तारे (Stars ) -  वह आकाशीय पिंड जिसके पास स्वयं की ऊष्मा तथा स्वयं के प्रकाश होती है उसे तारे कहते हैं सूर्य भी एक प्रकार का तारा है जिसके पास स्वयं की ऊष्मा तथा स्वयं की प्रकाश है। ( Note - पृथ्वी से सबसे नजदीक का तारा कौन सा है आपका सही उत्तर हो जाएगा यहां प...