छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन भू - प्राकृतिक रूप से छत्तीसगढ़ को चार प्रदेश में बांटा गया है जो इस प्रकार है- (1). पूर्वी बघेलखंड का पठार (2). जसपुर शामली पाठ प्रदेश (3). महानदी बेसिन (4.) दंडकारण्य का पठार भू - प्राकृतिक भौतिक स्वरूप के आधार पर भी छत्तीसगढ़ को बांटा गया है इस प्रकार से- (1). मैदानी प्रदेश (2). पहाड़ी प्रदेश (3). पठार एवं पाठ प्रदेश (1). पूर्वी बघेलखंड का पठार • उत्तरी सोन नदी बहती है इसीलिए इसे सोन के बेसिन का भाग भी कहा जाता है। • यह पठार को गंगा नदी और महा नदी के बीच जला विभाजन का दक्षिण भाग भी कहा जाता है। • इसमें आर्कियन शैल समूह और पहाड़ी क्षेत्र में प्रमुख रूप से गोंडवाना शैल समूह की प्रधानता है। • इसमें लाल पीली मिट्टी मुख्य रूप से पाई जाती । फसल - चावल ( मुख्य ) , ज्वार , तिल , अलसी । औसत वर्षा- 125 सेंटीमीटर. औसत ऊंचाई - 700 भी. Read More: छत्तीसगढ़ के संभाग और जिला के notes Note - कर्क रेखा किस के मध्य से गुजरती है। ( कोरिया के 16 तहसील से कर्क रेखा और भारतीय मानक...
छत्तीसगढ़ के जिले निर्माण का क्रम 1961 -62 में बने जिले - इस समय छत्तीसगढ़ राज्य नहीं बना था और यह मध्य प्रदेश प्रांत का हिस्सा था 1961- 62 में 2 जिलों का निर्माण हुआ रायपुर और बिलासपुर छत्तीसगढ़ के राज्य बनने से पहले। 1906 में बने जिले - 1906 में तीसरा जिला जो छत्तीसगढ़ के बनने से पहले बना वह था दुर्ग इस प्रकार 1906 में छत्तीसगढ़ जिला छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले कूल 3 जिला थी। Read More : छत्तीसगढ़ के वन्य जीव अभ्यारण 1948 में बने हुए जिले - 1948 जब हमारा देश आजाद हुआ इस समय 3 जिले और बने रायगढ़ ,बस्तर ,सरगुजा इस तरह 1948 तक छत्तीसगढ़ बनने से पहले कुल 6 जिले बन चुके थे। 1973 में बने जिले- 1973 केवल एक जिला बना जिसे राजनंदगांव कहते हैं । इस समय छत्तीसगढ़ बनने से पहले छत्तीसगढ़ में जिले का क्रम जो सातवें नंबर का जिला है वह राजनंदगांव है। Note - याद करने की ट्रिक ( 1948 से लेकर 1973 जिलों को इस प्रकार से आप याद कर सकते हैं ) "राय बस सर राज" राय - रायगढ़ बस - बस्तर सर - सरगुजा राज - राजनंदगांव
ऐतिहासिक काल (Historical Period) जैसा कि आपको पता है कि इतिहास का खोज हेरोडोटस ने किया था । इतिहास को जब हम अध्ययन करते हैं तो इसे तीन भागों में बांट कर अध्ययन किया जाता है प्रागैतिहासिक , आध इतिहास और ऐतिहासिक काल। ऐतिहासिक काल की परिभाषा - "वह इतिहास जहां लिखित के स्त्रोत उपलब्ध है और उन्हें पढ़ा भी जा सकता है " इसके अंतर्गत वैदिक काल से लेकर अभी तक के इतिहास को पढ़ा जाता है। ऊपर दिखाई दे रहे चित्र" ऐतिहासिक काल की संरचना "के अनुसार समझिए की ऐतिहासिक काल को किस प्रकार से अध्ययन किया जाता है। ऐतिहासिक काल को अध्ययन करने के लिए तीन मुख्य प्रकार में बांटा गया है जिससे हम ऐतिहासिक काल को अध्ययन करते हैं जो किस प्रकार है- पुरातात्विक, विदेश यात्रा और साहित्य इन तीनों प्रकार के स्त्रोत हम ऐतिहासिक काल का अध्ययन करते हैं। पुरातात्विक - इस प्रकार में इतिहास के ऐतिहासिक काल का अध्ययन करने के लिए दो मुख्य स्त्रोत है जो कुछ इस प्रकार है- (1) . सिक्का (2). अभिलेख (1) . सिक्का सिक्के का अध्ययन करना न्यूमेसमेटिकस कहलाता है सिंधु सभ्यता - इस सभ्यता में जो सिक्का पाया था व...
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