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8 वीं तक पास का नियम बदलेगा और 5वीं और 8वीं होंगे सीजी बोर्ड ।

इस बार पांचवी और आठवीं की एग्जाम सीजी बोर्ड होगी


8 वीं तक पास का नियम बदलेगा और 5वीं और 8वीं होंगे सीजी बोर्ड ।

हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने आरटीई कानून में बदलाव के निर्देश दिए हैं , विष्णु देव सरकार ने हाल ही में शिक्षा विभाग में अफसर से बात की तथा तथा बताया कि हालही में शिक्षा के स्तर मे गिरावट आ रही है , तथा बच्चों के गुणवत्ता में कमी आ रही है , वर्तमान के शिक्षा नीति में आठवीं तक बच्चों को पास कर दिया जा रहा है । चाहे इसमें बच्चों को लिखना पढ़ना नहीं भी आ रहा हो । जिससे नवमी के शिक्षकों को पूरा भार उठाना पढ़ रहा है ।अगले शिक्षा सत्र से यह नियम बदलने वाले हैं तथा पांचवी और आठवीं दोनों सीजी बोर्ड होने वाले हैं जिससे आने वाले बच्चों की शिक्षा और शिक्षा पद्धति में गुणवत्ता लाया जा सके साथ में छत्तीसगढ़ का विकास कराया जा सके ।

नवमी के शिक्षकों को उठानी पड़ती है पूरा भार 

मीडिया टीम भास्कर के अनुसार उन्होंने गरियाबंद धमतरी राजिम और अन्य सामने के जिलों में 50 से ज्यादा स्कूलों में उन्होंने शिक्षकों का इंटरव्यू लिया तथा उनसे पूछा गया की शिक्षा पद्धति जिसमें आठवीं तक बच्चों को बिना लिखने पढ़ने के बाद भी पास कर दिया जाता है क्या यह शिक्षा पद्धति सही है तो किसी भी शिक्षकों ने यह पद्धति को सही नहीं कहा उन्होंने बताया कि सिर्फ 5% बच्चे ही हैं जो इमानदारी से पढ़ते हैं इसके अलावा 95% जो बच्चे हैं वह ठीक से ध्यान नहीं देते तथा 20% बच्चे जो एवरेज पढ़ाई करते हैं इस शिक्षा पद्धति से बच्चों में पढ़ाई में जो इंटरेस्ट है वह खत्म हो रही है और पूरा जो प्रेशर है इसमें बच्चों को भी नवमी के बाद आती है। 


ग्रेडिंग सिस्टम इसमें में छात्रों का मूल्यांकन सही नहीं

वर्तमान शिक्षा पद्धति के अनुसार बच्चों को मासिक मूल्यांकन तिमाही मूल्यांकन तथा अर्धवार्षिक परीक्षा और वार्षिक परीक्षा के अनुसार उन्हें उनके परीक्षा के अनुसार ए ,बी ,सी ,डी ग्रेट दिया जाता है इसमें डी ग्रेड का अर्थ होता है बच्चों को बहुत ज्यादा फोकस की जरूरत है। इसमें बच्चों को ग्रेडिंग के साथ नंबर भी दिया जाता है , बच्चा कितना भी कमजोर हो उसे फेल करना नहीं है। 

शिक्षा विभाग का रिपोर्ट

2021 में शिक्षा विभाग ने आंतरिक मूल्यांकन किया था जिसमें जो चौथी के छात्र हैं उनका स्तर पहली के छात्र तथा जो आठवीं के छात्र हैं उनका स्तर चौथी, पांचवी के छात्र के स्तर के बराबर है और इसका जो असर है वह 10वीं 11वीं 12वीं में खराब रिजल्ट साथ ही पढ़ाई में कमजोर जो की साफ-साफ दिख रही है।


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