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सिंघनपुर गुफा नोट्स ( Singhanpur Cave Notes ) छत्तीसगढ़ का प्रमुख पाषाणकालीन स्थल।

सिंघनपुर गुफा इस पेज में हम छत्तीसगढ़ के प्रमुख पाषाण कालीन स्थल सिंघनपुर के बारे में जानने वाले हैं जो छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित सिंघनपुर गुफा को सबसे पुरानी पाषाण कालीन स्थल कहा जाता है इसमें बहुत सारे शैल चित्र और औजार प्राप्त हुए हैं चलिए इस हम क्रमानुसार जानते हैं - उपनाम  तो यह छत्तीसगढ़ का सबसे पुराना पाषाण कालीन स्थल है साथ में इसे छत्तीसगढ़ का भीमबेटका कहा जाता है।  स्थिति  यह छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में  चांवर ढाल पहाड़ी या चंबरढाल पहाड़ी में स्थित है।  खोज खोज की बात करें तो यह सबसे पहली बार 1910 में सेल चित्र की खोज हुआ बात करें किसने की तो ब्रिटिश काल के मध्य प्रांत में प्रशासक का नाम था एंडरसन ने खोज किया था । बात करें कि कौन - सी नदी  के किनारे खोज किया था तो महानदी के किनारे।  सर्वेक्षण बात करें इसकी सर्वेक्षण की तो 1925- 27 में इसका व्यापक सर्वेक्षण 30 के दशक में हुआ था रेलवे इंजीनियर थे अमरनाथ दत्त ने करवाया था। सिंघनपुर के अंतर्गत क्या- क्या प्राप्त हुआ? शैल चित्र  छत्तीसगढ़ के सिंघनपुर गुफा में सेल चित्र को तो प्राप्...

ऑक्सीकारक और अपचायक क्या है , परिभाषा, उदाहरण संपूर्ण जानकारी Notes। ( What is Oxidising Agent and Reducing Agent , Defination and all Details Notes in Hindi)

  विज्ञान में हमे दो नाम आपको बहुत सुनने को मिलते हैं :- (1.) ऑक्सीकारक (Oxidising Agent) (2.) अपचायक (Reducing Agent) ऑक्सीकारक (Oxidi oksing Agent): -   वे पदार्थ जो ऑक्सीकरण क्रिया करवाते हैं अर्थात् जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर स्वयं अपचयित (Reduce) होते हैं, ऑक्सीकारक कहलाते हैं। इसे हम इलेक्ट्रॉन गग्रहणाक के रूप में समझ सकते हैं। उदाहरण : सामान्य ऑक्सीकारक है- ऑक्सीजन, हाइड्रोजन परॉक्साइड एवं हैलोजन (फ्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन इत्यादि)। इनमें फ्लोरीन प्रबलतम ऑक्सीकारक है। इसकी वैद्युत ऋणात्मकता सर्वाधिक है। अपचायक (Reducing Agent):-  " पदार्थ जो अपचयन क्रिया करवाते हैं अर्थात् जो इलेक्ट्रॉन त्याग कर स्वयं ऑक्सीकृत (Oxidise)होते हैं, 'अपचायक' कहलाता है ।"  इस तरह आप इसे एक reduser के रूप में याद कर सकते है । उदाहरण:  ऑक्सालिक एसिड ,  सल्फाइट यौगिक , फॉर्मिक एसिड शामिल हैं। 

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छत्तीसगढ़ में मृदा का वितरण notes (. Chhattisgarh mein mrida ka vitran)

छत्तीसगढ़ में मृदा का वितरण  1. काली मिट्टी- अन्य नाम -  कन्हर, भर्री, रेगूर निर्माण -  इसका निर्माण बेसन के क्षरण से होता है। PH -   7.5 % काला रंग का कारण -  इसका काला रंग फेरिक टाइटेनियम के कारण होता है। विस्तार -  इस मिट्टी का विस्तार मुख्य रूप से राजनांदगांव मुंगेली कवर्धा है। अन्य - - इसके साथ यह रायपुर ,राजिम ,कुरूद ,मुंगेली ,गरियाबंद , दुर्ग आदि पाट प्रदेश में पाए जाते हैं। फसल -  इसमें गेहूं , कपास , चना , गन्ना , तिलहन आदि फसल होते हैं। • इस मिट्टी में मुख्य रूप से लोहा ,चुना ,मैग्नीशियम , एलुमिनियम की प्रधानता होती है। 2. लाल पीली मिट्टी -   छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा पाई जाने वाली मिट्टी है छत्तीसगढ़ में 55% पाए जाते हैं।  अन्य नाम -  मटासी मिट्टी pH -  5.8 - 8.4 pH तक हो सकता है इसीलिए यह छारीय प्रकृति और अम्लीय दोनों हो सकता है। निर्माण -  लाल पीली मिट्टी का निर्माण अपरदित गोंडवाना शैल समूह एवं कडप्पा शैल समूह से मिलकर होता है। रंग -  पीला रंग फेरिक ऑक्साइड , लाल रंग फेरस ऑक्साइड के कारण होता है। फसल...

भू- वैज्ञानिक संरचना छत्तीसगढ़ नोट्स (chhattisgarh ka bhu vaigyanik sanrachna hindi Notes)

 भू- वैज्ञानिक संरचना छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ के भूवैज्ञानिक संरचना को 5 भागों में बांटा गया है इस प्रकार है-  1.आर्कियन शैल समूह 2.धारवाड़ शैल समूह 3.पुरानासंघ शैल समूह 4.गोंडवाना शैल समूह 5. दक्कन ट्रैप  1.आर्कियन शैल समूह बात करें आर्कियन शैल समूह की तरह छत्तीसगढ़ में लगभग सभी जगह में पाई जाती है ( लगभग 50% भाग)  निर्माण - इसका निर्माण आग्नेय चट्टान के नीचे पर से हुआ है।  अग्नि चट्टान का अर्थ - आग्नेय चट्टान का अर्थ होता है जब पृथ्वी के अंदर का लावा ऊपर आकर परत दर परत एक जगह जमा होगा तो वह ट्रैप कहलाएगा , उसी तरह यह लावा जब एक चट्टान का रूप लेगा जमकर तो उसे अग्नि चट्टान कहेंगे। खनिज - बात करें आर्कियन शैल समूह में कौन कौन से खनिज पाए जाएंगे -  ग्रेनाइट , सिस्ट, निस, कांग्लो मेरिट आदि यह सभी चट्टाने है और यह खनिज के रूप में भी पाए जाते हैं। खनिज - क्वार्ट्ज, केस्पर ( यहां पर शैल समूह बहुत सारे चट्टानों का समूह मिलकर शैल समूह का निर्माण करती है ।)  (2.) धारवाड़ शैल समूह धारवाड़ शैल समूह जलीय अवसादी चट्टानों को कहा जाता है। निर्माण -  इसका निर्माण अर...

छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन Notes ( Chhattisgarh ka prakrutik vibhajan Notes )

    छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन  भू - प्राकृतिक रूप से छत्तीसगढ़ को चार प्रदेश में बांटा गया है जो इस प्रकार है-  (1). पूर्वी बघेलखंड का पठार  (2). जसपुर शामली पाठ प्रदेश (3). महानदी बेसिन (4.) दंडकारण्य का पठार    भू - प्राकृतिक भौतिक स्वरूप के आधार पर भी छत्तीसगढ़ को बांटा गया है इस प्रकार से-  (1). मैदानी प्रदेश (2). पहाड़ी प्रदेश (3). पठार एवं पाठ प्रदेश   (1). पूर्वी बघेलखंड का पठार  • उत्तरी सोन नदी बहती है इसीलिए इसे सोन के बेसिन का भाग भी कहा जाता है। • यह पठार को गंगा नदी और महा नदी के बीच जला विभाजन का दक्षिण भाग भी कहा जाता है।  • इसमें आर्कियन शैल समूह और पहाड़ी क्षेत्र में प्रमुख रूप से गोंडवाना शैल समूह की प्रधानता है। • इसमें लाल पीली मिट्टी मुख्य रूप से पाई जाती ।  फसल -  चावल ( मुख्य ) , ज्वार , तिल , अलसी ।   औसत वर्षा-  125 सेंटीमीटर. औसत ऊंचाई - 700 भी. Read More: छत्तीसगढ़ के संभाग और जिला के notes Note - कर्क रेखा किस के मध्य से गुजरती है। ( कोरिया के 16 तहसील से कर्क रेखा और भारतीय मानक...

छत्तीसगढ़ का जिला निर्माण का क्रम Notes ( Chhattisgarh ka jilla nirman ke kram )

    छत्तीसगढ़ के जिले निर्माण का क्रम  1961 -62 में बने जिले - इस समय छत्तीसगढ़ राज्य नहीं बना था और यह मध्य प्रदेश प्रांत का हिस्सा था 1961- 62 में 2 जिलों का निर्माण हुआ रायपुर और बिलासपुर छत्तीसगढ़ के राज्य बनने से पहले।  1906 में बने जिले - 1906 में तीसरा जिला जो छत्तीसगढ़ के बनने से पहले बना वह था दुर्ग इस प्रकार 1906 में छत्तीसगढ़ जिला छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले कूल 3 जिला थी।  Read More : छत्तीसगढ़ के वन्य जीव अभ्यारण 1948 में बने हुए जिले - 1948 जब हमारा देश आजाद हुआ इस समय 3 जिले और बने रायगढ़ ,बस्तर ,सरगुजा इस तरह 1948 तक छत्तीसगढ़ बनने से पहले कुल 6 जिले बन चुके थे। 1973 में बने जिले-    1973 केवल एक जिला बना जिसे राजनंदगांव कहते हैं । इस समय छत्तीसगढ़ बनने से पहले छत्तीसगढ़ में जिले का क्रम जो सातवें नंबर का जिला है वह राजनंदगांव है। Note - याद करने की ट्रिक  ( 1948 से लेकर 1973 जिलों को इस प्रकार से आप याद कर सकते हैं ) "राय बस सर  राज"  राय - रायगढ़ बस  - बस्तर सर - सरगुजा राज - राजनंदगांव