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UPSC prelims के अभी तक के प्रागैतिहासिक काल एवं सिंधु घाटी सभ्यता के PYQ

UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता पाने के लिए पिछले वर्ष के प्रश्न (PYQ) का विश्लेषण करना सबसे जरूरी कदम है। इस पोस्ट में हम आपके लिए लेकर आए हैं साल 1995 से 2025 तक के सभी महत्वपूर्ण प्रश्न, वह भी पूरी तरह हिंदी में। हमने ना सिर्फ सवालों के सही उत्तर दिए हैं, बल्कि उनकी विस्तृत व्याख्या (विस्तृत व्याख्या) भी की है, ताकि आप कॉन्सेप्ट को गहराई से समझ सकें और आने वाली परीक्षाओं की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकें।'' अध्याय 01: प्राचीन भारत प्रागैतिहासिक काल एवं सिंधु घाटी सभ्यत ा 1. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'नचती हुई लड़की' (Dancing Girl) नामक विख्यात नारी लघुमूर्ति किस पदार्थ की बनी है? (2025) (a) इन्द्रगोप मणि (Carnelian) (b) मृत्तिका (Clay) (c) कांस्य (Bronze) (d) स्वर्ण (Gold) Show Answer & Details उत्तर: (c) कांस्य यह विश्व की सबसे पुरानी कांस...

UPSC Previous Year Questions (2025 - 1995 ) in Hindi ( यूपीएससी के पिछले वर्ष के प्रश्न (2025 - 1995) हिंदी में )

विषय-सूची पेपर 1 (सामान्य अध्ययन) भारत का इतिहास एवं भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन 1. प्राचीन भारत प्रागैतिहासिक काल एवं सिन्धु घाटी सभ्यता वैदिक संस्कृति महाजनपद एवं पूर्व मौर्यकाल बौद्ध एवं जैन धर्म मौर्य एवं मौर्योत्तर काल संगम काल एवं दक्षिण भारत का इतिहास गुप्त साम्राज्य एवं प्रशासन गुप्तोत्तर काल / प्रारम्भिक मध्यकाल 2. मध्यकालीन भारत विदेशी आक्रमण एवं दिल्ली सल्तनत क्षेत्रीय साम्राज्य का उदय विजयनगर एवं बहमनी साम्राज्य भक्ति एवं सूफी आन्दोलन मुगल साम्राज्य मराठा शासन एवं प्रशासन 3. आधुनिक भारत एवं भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन यूरोपीय शक्तियों का आगमन और भारत की ब्रिटिश विजय ब्रिटिश प्रशासन एवं नीतियां भारत में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आन्द...

UPSC History Foundation Course In hindi

  Upsc history Subject e book (Prelims + Mains) in hindi by Upsc walla Book Contains - प्राक इतिहास   इतिहास  क्या है? इतिहास के भाग  प्रागेतिक इतिहास -    पाषाण काल   पाषाण काल के भा ग        2.आध इतिहास  सिंधु सभ्यता  (सिंधु सभ्यता का नाम क्यों पड़ा ,क्षेत्रफल ,आकार, महत्त्वपूर्ण खोज )  हड़प्पा सभ्यता  चंदहुदडो   मोहनजुदडो रोपड़ , बनवाली , कालीबंगा  , धोलावीरा , सुत्कागेनडोर , लोथल  , रंगपुर   सिंधु सभ्यता की विशेषताये  मेसोपोटामिया की सभ्यता   मिस्र की सभ्यता  यूरोपियन सभ्यताएं       3. ऐतिहासिक इतिहास  पुरातात्विक स्त्रोत सिक्का  अभिलेख हर एक दो दिन में 1 नोट्स Notes upload होगी । आप हमारे टेलीग्राम चैनल और यूट्यूब चैनल को फॉलो और subscribe कर लीजिए ।

छत्तीसगढ़ में लागू होगा बाघ मित्र मॉडल (Chhattisgarh bagh mitra moadal )

1. छत्तीसगढ़ में लागू होगा ‘बाघ मित्र मॉडल’ छत्तीसगढ़ सरकार ने बाघों और अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ‘बाघ मित्र योजना’ को लागू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत प्रशिक्षित स्वयंसेवकों और अधिकारियों की मदद से बाघों के संरक्षण और मानव-बाघ संघर्ष को कम करने पर ज़ोर दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश की तर्ज़ पर गांवों में जागरूकता फैलाने और रिपोर्टिंग व्यवस्था को सशक्त किया जाएगा। 2. बाघों और हाथियों की मृत्यु पर हाईकोर्ट में सुनवाई राज्य में बाघों और हाथियों की हो रही असामयिक मृत्यु पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा, जिसके तहत वन विभाग ने हलफनामा पेश किया और आगे की कार्रवाई की जानकारी दी। कोर्ट में बताया गया कि 17 मार्च को हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस दिशा में कई निर्णय लिए गए हैं। 3. कोरबा में बाघ की संदिग्ध मौत – गंभीर चिंता का विषय 8 नवंबर 2024 को कोरबा जिले के गुरु घासीदास नेशनल पार्क रिज़र्व क्षेत्र में एक बाघ का शव सड़ी-गली हालत में पाया गया। यह इलाका छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश सीमा के पास है और बाघों के मूवमेंट का अ...

करीब चार दशक बाद राजनांदगांव खैरागढ़ और कवर्धा फौज की वापसी After four decades, Rajnandgaon Khairagarh and Kawardha army returns in Hindi

 1. राजनांदगांव, खैरागढ़ और कवर्धा नक्सलवाद से मुक्त – एक ऐतिहासिक उपलब्धि छत्तीसगढ़ के तीन ज़िले – राजनांदगांव, खैरागढ़ और कवर्धा – जो वर्षों से नक्सली हिंसा और आतंक के साए में थे, अब आधिकारिक रूप से नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से बाहर कर दिए गए हैं। यह राज्य सरकार और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संयुक्त रणनीति और स्थानीय लोगों के सहयोग का परिणाम है। इन जिलों में पिछले कुछ वर्षों में नक्सली गतिविधियों में भारी कमी देखी गई है, जिससे यह संभव हुआ। इससे इन क्षेत्रों में शांति और स्थिरता की वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ है। 2. सुरक्षा बलों की तैनाती और चरणबद्ध वापसी लंबे समय तक नक्सलियों के ख़िलाफ़ मोर्चा संभालने वाले सुरक्षा बलों की अब इन क्षेत्रों से वापसी शुरू हो चुकी है। ITBP (इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस) और CRPF (केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल) की बटालियनों की तैनाती धीरे-धीरे कम की जा रही है। हालांकि, पूरी तरह वापसी से पहले इन इलाकों में स्थायी पुलिस व्यवस्था और गुप्तचर नेटवर्क को मज़बूत किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नक्सली दोबारा इन क्षेत्रों में अपनी जड़ें न जमा सकें। 3. व...

ई - ऑफिस, स्वागतम और सीएमओ ऑनलाइन पोर्टल हुआ सुरु

ई - ऑफिस, स्वागतम और सीएमओ ऑनलाइन पोर्टल हुआ सुरु  छत्तीसगढ़ में ई गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए तथा भ्रष्टाचार को कम करने के लिए आईटी का उपयोग किया जा रहा है बुधवार को साय ने अभी तीन पोर्टल लॉन्च किया जिसमें ई - ऑफिस स्वागतम और सीएमओ ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया । इस पहल से आने वाली सरकार में भ्रष्टाचार की गुंजाइश को कम करने तथा सरकारी कामकाजों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए और पारदर्शिता लाने के लिए छत्तीसगढ़ की सरकार ने ई गवर्नेंस आईटी का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करने का निर्णय लिया है। जिसका शुभारंभ साइन ने महानदी भवन में बटन दबाकर किया । इस दौरान साइन ने मुख्य सचिव को सभी विभागों में ई ऑफिस पोर्टल उपयोग करने के निर्देश दिए तथा सभी फाइलों का डिजिटल कारण करने का निर्देश भी दिए। यह   तीनों ऑनलाइन पोर्टल विष्णु देव सहाय ने मंत्रालय में लॉन्च किया भ्रष्टाचार रोधी होंगे यह तीन ऑनलाइन पोर्टल भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश ही नहीं ।  ई ऑफिस पोर्टल क्या है ? ई - ऑफिस प्रणाली शुरुआती चरण में सामान्य प्रशासन में लागू किया जाएगा इसकी सहायता से जितने भी फाइल हैं सबका डिजिटल कारण किया जाएगा...

8 वीं तक पास का नियम बदलेगा और 5वीं और 8वीं होंगे सीजी बोर्ड ।

8 वीं तक पास का नियम बदलेगा और 5वीं और 8वीं होंगे सीजी बोर्ड । हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने आरटीई कानून में बदलाव के निर्देश दिए हैं , विष्णु देव सरकार ने हाल ही में शिक्षा विभाग में अफसर से बात की तथा तथा बताया कि हालही में शिक्षा के स्तर मे गिरावट आ रही है , तथा बच्चों के गुणवत्ता में कमी आ रही है , वर्तमान के शिक्षा नीति में आठवीं तक बच्चों को पास कर दिया जा रहा है । चाहे इसमें बच्चों को लिखना पढ़ना नहीं भी आ रहा हो । जिससे नवमी के शिक्षकों को पूरा भार उठाना पढ़ रहा है ।अगले शिक्षा सत्र से यह नियम बदलने वाले हैं तथा पांचवी और आठवीं दोनों सीजी बोर्ड होने वाले हैं जिससे आने वाले बच्चों की शिक्षा और शिक्षा पद्धति में गुणवत्ता लाया जा सके साथ में छत्तीसगढ़ का विकास कराया जा सके । नवमी के शिक्षकों को उठानी पड़ती है पूरा भार  मीडिया टीम भास्कर के अनुसार उन्होंने गरियाबंद धमतरी राजिम और अन्य सामने के जिलों में 50 से ज्यादा स्कूलों में उन्होंने शिक्षकों का इंटरव्यू लिया तथा उनसे पूछा गया की शिक्षा पद्धति जिसमें आठवीं तक बच्चों को बिना लिखने पढ़ने के बाद भी पास कर दिया जाता है क्या यह श...

सिंघनपुर गुफा नोट्स ( Singhanpur Cave Notes ) छत्तीसगढ़ का प्रमुख पाषाणकालीन स्थल।

सिंघनपुर गुफा इस पेज में हम छत्तीसगढ़ के प्रमुख पाषाण कालीन स्थल सिंघनपुर के बारे में जानने वाले हैं जो छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित सिंघनपुर गुफा को सबसे पुरानी पाषाण कालीन स्थल कहा जाता है इसमें बहुत सारे शैल चित्र और औजार प्राप्त हुए हैं चलिए इस हम क्रमानुसार जानते हैं - उपनाम  तो यह छत्तीसगढ़ का सबसे पुराना पाषाण कालीन स्थल है साथ में इसे छत्तीसगढ़ का भीमबेटका कहा जाता है।  स्थिति  यह छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में  चांवर ढाल पहाड़ी या चंबरढाल पहाड़ी में स्थित है।  खोज खोज की बात करें तो यह सबसे पहली बार 1910 में सेल चित्र की खोज हुआ बात करें किसने की तो ब्रिटिश काल के मध्य प्रांत में प्रशासक का नाम था एंडरसन ने खोज किया था । बात करें कि कौन - सी नदी  के किनारे खोज किया था तो महानदी के किनारे।  सर्वेक्षण बात करें इसकी सर्वेक्षण की तो 1925- 27 में इसका व्यापक सर्वेक्षण 30 के दशक में हुआ था रेलवे इंजीनियर थे अमरनाथ दत्त ने करवाया था। सिंघनपुर के अंतर्गत क्या- क्या प्राप्त हुआ? शैल चित्र  छत्तीसगढ़ के सिंघनपुर गुफा में सेल चित्र को तो प्राप्...

ऑक्सीकारक और अपचायक क्या है , परिभाषा, उदाहरण संपूर्ण जानकारी Notes। ( What is Oxidising Agent and Reducing Agent , Defination and all Details Notes in Hindi)

  विज्ञान में हमे दो नाम आपको बहुत सुनने को मिलते हैं :- (1.) ऑक्सीकारक (Oxidising Agent) (2.) अपचायक (Reducing Agent) ऑक्सीकारक (Oxidi oksing Agent): -   वे पदार्थ जो ऑक्सीकरण क्रिया करवाते हैं अर्थात् जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर स्वयं अपचयित (Reduce) होते हैं, ऑक्सीकारक कहलाते हैं। इसे हम इलेक्ट्रॉन गग्रहणाक के रूप में समझ सकते हैं। उदाहरण : सामान्य ऑक्सीकारक है- ऑक्सीजन, हाइड्रोजन परॉक्साइड एवं हैलोजन (फ्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन इत्यादि)। इनमें फ्लोरीन प्रबलतम ऑक्सीकारक है। इसकी वैद्युत ऋणात्मकता सर्वाधिक है। अपचायक (Reducing Agent):-  " पदार्थ जो अपचयन क्रिया करवाते हैं अर्थात् जो इलेक्ट्रॉन त्याग कर स्वयं ऑक्सीकृत (Oxidise)होते हैं, 'अपचायक' कहलाता है ।"  इस तरह आप इसे एक reduser के रूप में याद कर सकते है । उदाहरण:  ऑक्सालिक एसिड ,  सल्फाइट यौगिक , फॉर्मिक एसिड शामिल हैं। 

सिंधु सभ्यता की संपूर्ण जानकारी 1 मिनट में याद करने की trick।।

छत्तीसगढ़ में मृदा का वितरण notes (. Chhattisgarh mein mrida ka vitran)

छत्तीसगढ़ में मृदा का वितरण  1. काली मिट्टी- अन्य नाम -  कन्हर, भर्री, रेगूर निर्माण -  इसका निर्माण बेसन के क्षरण से होता है। PH -   7.5 % काला रंग का कारण -  इसका काला रंग फेरिक टाइटेनियम के कारण होता है। विस्तार -  इस मिट्टी का विस्तार मुख्य रूप से राजनांदगांव मुंगेली कवर्धा है। अन्य - - इसके साथ यह रायपुर ,राजिम ,कुरूद ,मुंगेली ,गरियाबंद , दुर्ग आदि पाट प्रदेश में पाए जाते हैं। फसल -  इसमें गेहूं , कपास , चना , गन्ना , तिलहन आदि फसल होते हैं। • इस मिट्टी में मुख्य रूप से लोहा ,चुना ,मैग्नीशियम , एलुमिनियम की प्रधानता होती है। 2. लाल पीली मिट्टी -   छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा पाई जाने वाली मिट्टी है छत्तीसगढ़ में 55% पाए जाते हैं।  अन्य नाम -  मटासी मिट्टी pH -  5.8 - 8.4 pH तक हो सकता है इसीलिए यह छारीय प्रकृति और अम्लीय दोनों हो सकता है। निर्माण -  लाल पीली मिट्टी का निर्माण अपरदित गोंडवाना शैल समूह एवं कडप्पा शैल समूह से मिलकर होता है। रंग -  पीला रंग फेरिक ऑक्साइड , लाल रंग फेरस ऑक्साइड के कारण होता है। फसल...

भू- वैज्ञानिक संरचना छत्तीसगढ़ नोट्स (chhattisgarh ka bhu vaigyanik sanrachna hindi Notes)

 भू- वैज्ञानिक संरचना छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ के भूवैज्ञानिक संरचना को 5 भागों में बांटा गया है इस प्रकार है-  1.आर्कियन शैल समूह 2.धारवाड़ शैल समूह 3.पुरानासंघ शैल समूह 4.गोंडवाना शैल समूह 5. दक्कन ट्रैप  1.आर्कियन शैल समूह बात करें आर्कियन शैल समूह की तरह छत्तीसगढ़ में लगभग सभी जगह में पाई जाती है ( लगभग 50% भाग)  निर्माण - इसका निर्माण आग्नेय चट्टान के नीचे पर से हुआ है।  अग्नि चट्टान का अर्थ - आग्नेय चट्टान का अर्थ होता है जब पृथ्वी के अंदर का लावा ऊपर आकर परत दर परत एक जगह जमा होगा तो वह ट्रैप कहलाएगा , उसी तरह यह लावा जब एक चट्टान का रूप लेगा जमकर तो उसे अग्नि चट्टान कहेंगे। खनिज - बात करें आर्कियन शैल समूह में कौन कौन से खनिज पाए जाएंगे -  ग्रेनाइट , सिस्ट, निस, कांग्लो मेरिट आदि यह सभी चट्टाने है और यह खनिज के रूप में भी पाए जाते हैं। खनिज - क्वार्ट्ज, केस्पर ( यहां पर शैल समूह बहुत सारे चट्टानों का समूह मिलकर शैल समूह का निर्माण करती है ।)  (2.) धारवाड़ शैल समूह धारवाड़ शैल समूह जलीय अवसादी चट्टानों को कहा जाता है। निर्माण -  इसका निर्माण अर...

छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन Notes ( Chhattisgarh ka prakrutik vibhajan Notes )

    छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक विभाजन  भू - प्राकृतिक रूप से छत्तीसगढ़ को चार प्रदेश में बांटा गया है जो इस प्रकार है-  (1). पूर्वी बघेलखंड का पठार  (2). जसपुर शामली पाठ प्रदेश (3). महानदी बेसिन (4.) दंडकारण्य का पठार    भू - प्राकृतिक भौतिक स्वरूप के आधार पर भी छत्तीसगढ़ को बांटा गया है इस प्रकार से-  (1). मैदानी प्रदेश (2). पहाड़ी प्रदेश (3). पठार एवं पाठ प्रदेश   (1). पूर्वी बघेलखंड का पठार  • उत्तरी सोन नदी बहती है इसीलिए इसे सोन के बेसिन का भाग भी कहा जाता है। • यह पठार को गंगा नदी और महा नदी के बीच जला विभाजन का दक्षिण भाग भी कहा जाता है।  • इसमें आर्कियन शैल समूह और पहाड़ी क्षेत्र में प्रमुख रूप से गोंडवाना शैल समूह की प्रधानता है। • इसमें लाल पीली मिट्टी मुख्य रूप से पाई जाती ।  फसल -  चावल ( मुख्य ) , ज्वार , तिल , अलसी ।   औसत वर्षा-  125 सेंटीमीटर. औसत ऊंचाई - 700 भी. Read More: छत्तीसगढ़ के संभाग और जिला के notes Note - कर्क रेखा किस के मध्य से गुजरती है। ( कोरिया के 16 तहसील से कर्क रेखा और भारतीय मानक...

छत्तीसगढ़ का जिला निर्माण का क्रम Notes ( Chhattisgarh ka jilla nirman ke kram )

    छत्तीसगढ़ के जिले निर्माण का क्रम  1961 -62 में बने जिले - इस समय छत्तीसगढ़ राज्य नहीं बना था और यह मध्य प्रदेश प्रांत का हिस्सा था 1961- 62 में 2 जिलों का निर्माण हुआ रायपुर और बिलासपुर छत्तीसगढ़ के राज्य बनने से पहले।  1906 में बने जिले - 1906 में तीसरा जिला जो छत्तीसगढ़ के बनने से पहले बना वह था दुर्ग इस प्रकार 1906 में छत्तीसगढ़ जिला छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले कूल 3 जिला थी।  Read More : छत्तीसगढ़ के वन्य जीव अभ्यारण 1948 में बने हुए जिले - 1948 जब हमारा देश आजाद हुआ इस समय 3 जिले और बने रायगढ़ ,बस्तर ,सरगुजा इस तरह 1948 तक छत्तीसगढ़ बनने से पहले कुल 6 जिले बन चुके थे। 1973 में बने जिले-    1973 केवल एक जिला बना जिसे राजनंदगांव कहते हैं । इस समय छत्तीसगढ़ बनने से पहले छत्तीसगढ़ में जिले का क्रम जो सातवें नंबर का जिला है वह राजनंदगांव है। Note - याद करने की ट्रिक  ( 1948 से लेकर 1973 जिलों को इस प्रकार से आप याद कर सकते हैं ) "राय बस सर  राज"  राय - रायगढ़ बस  - बस्तर सर - सरगुजा राज - राजनंदगांव

छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय उद्यान notes (. Chhattisgarh ke rashtriy udyan in hindi Notes )

   छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय उद्यान  (1.) इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (1978, बिजापुर ) • इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान की कुल क्षेत्रफल 1258 स्क्वायर किलोमीटर है । • यह छत्तीसगढ़ का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान है इसकी स्थापना 1978 को हुई थी और यह बीजापुर में स्थित है। • इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान इंद्रावती नदी इसी राष्ट्रीय उद्यान से होकर बहती है इसीलिए इसका नाम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान। • इसे 1983 को प्रोजेक्ट टाइगर घोषित किया जिसे पुनः 2009 में टाइगर रिजर्व के रूप में बनाया गया। (2.) गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान • गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1981 को हुई थी। • गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान कुल 1401 40 स्क्वायर किलोमीटर मैं फैला हुआ है जो कोरिया से सरगुजा तक फैला हुआ है। • यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है । • पुराना नाम संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (3.) कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान  • कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1983 को हुई थी और यह बस्तर में स्थित है। • कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान का कुल क्षेत्रफल 200 स्क्वायर किलोमीटर है।  • छत्तीस...

छत्तीसगढ़ के वन्य जीव अभ्यारण Notes ( Chhattisgarh ke Vanya jeev abhyaran -

  छत्तीसगढ़ वन्य जीव अभ्यारण Notes in hindi    1.तमोरपिंगला वन्य अभ्यारण- •  छत्तीसगढ़ का तमोर पिंगला वन्य अभ्यारण को सन 1978 ईसवी में बनाया गया था। • यह छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में स्थित है । •इस का कुल क्षेत्रफल 608 स्क्वायर किलोमीटर है। • तमोरपिंगला नीलगाय के लिए प्रचलित है । 2. सेमरसोत वन्य अभ्यारण-  • यह अभ्यारण बलरामपुर में स्थित है। • इसकी स्थापना 1978 में ही हुई थी।  • इसका कुल क्षेत्रफल 430 स्क्वायर किलोमीटर है । • सिमरसोत हाथी के लिए विख्यात है।   3. बादलखोल वन्य अभ्यारण  • बादलखोल वन्य जीव अभ्यारण छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित है । •इसकी स्थापना 1975 को हुई थी।  •इस का कुल क्षेत्रफल 105 स्क्वायर किलोमीटर है  •और यह छत्तीसगढ़ की सबसे छोटी वन्य अभ्यारण है । • बादलखोल वन्य अभ्यारण हाथी के लिए प्रसिद्ध है।   4. गोमर्डा वन्य जीव अभ्यारण  •गोमर्दा वन्यजीव अभ्यारण रायगढ़ जिले में स्थित है। •इसकी स्थापना 1975 ईसवी सन में हुई थी। •इसका कुल क्षेत्रफल 278 स्क्वायर किलोमीटर है। •इसमें सर्वाधिक सोन कुत्ता के लिए...